तुम पढ़ती हो इसलिए लिखता हूँ..
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वरना में तो महसूस करके भी जी लेता हूँ…
जताने का हक छीना जा सकता है..
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मगर चाहने का हक भला कौन छीन पाया है…
होश में इश्क कहाँ..
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और इश्क में होश कहाँ…
मैं कैसे समझाऊँ तुम्हें अपनी चाहत का इशारा..
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अब धडकनें भी तुम्हारी हो गई है और दिल भी तुम्हारा…
मुश्किल भी तुम हो,
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हल भी तुम हो..
होती है जो दिल में,
वो हलचल भी तुम हो…
इतने बड़े जहान् में मेरा भी छोटा सा एक संसार है..
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एक मैं हूँ , एक दिल है और एक मेरा दिलदार है…
दूर रहकर भी तुम्हारी हर खबर रखते हैं..
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हम पास तुम्हें कुछ इस कदर रखते हैं…
जब कोई तुम्हें शिद्दत से चाहे,
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तो उसको संजो लेना..
जिंदगी में बार-बार नहीं मिलते,
ये टूटकर चाहने वाले…
महज जुनून नहीं..
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मेरा सुकून भी हो तुम…
काश ! तुम पूछो कि तुम मेरे क्या लगते हो..
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मैं गले लगाऊँ और कहूँ,
सब कुछ…

Nice 🙂
Wow… Nice…